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Saturday, 22 June 2013

Rape and clothes

मेरे शहर मे बलात्कार की घटना हुई एक बच्ची के साथ खबर पढ़कर मुझे एक पुलिस अफसर की घटना याद आई .कि काफी समय पहिले उन महाशय ने कहा था ,कि बलात्कार का कारण महिलाये खुद है 'उनके भड़कीले कपडे के कारण वे

Monday, 21 January 2013

बॉयफ्रेंड को कैसे मनाये

किसी भी रिश्ते में कहा-सुनी और लडाई-झगडा तो थोड़ा  बहुत होता ही रहता है।लेकिन के प्यार भरे आपका अहं तो सामने नहीं आ रहा है अगर आ रहा है तो आपकी प्यार भरी लाइफ ख़तम हो सकती है अब भई अगर आपका पार्टनर थोडा  गुस्सैल टाइप का है तो आपको कुछ दिमाग एवम धीरज से गेम खेलना पड़ेगा ,अब यदि  बॉयफेंड गुस्सा हो

Tuesday, 1 January 2013

मैं बच गयी


कल रात को सपने मैंने देखा की कोई परछाई ने सिरहाने मैं एक पर्ची रखकर चली गयी है अब पर्ची मैं क्या लिखा था आपको बता दू ,
धन्यबाद प्यारे  पापा जी ,आप  घर मैं उत्सव मनाइये  नहीं तो इस भारत भूमि जो कभी संस्कार से पूर्ण था,, इसमे  मैं जिन्दगी और मौत से शायद लड़ रही होती इस भारत मैं इन घिनौने पिशाचों से बच पाना किसी भी लड़की के लिए बहुत ही मुश्किल है मैं निरिह अपनी अस्मत लुटा कर दरिंदगी का शिकार होकर  तिल तिल कर मरने से अच्छा  आपने किया की मुझे माँ के भ्रूण मैं ही मार दिया  वैसे  भी माथे के घिनौने दाग लेकर नहीं जी सकती थी  मेरी माँ सही लोरी गाती थी "बेटी तेरा देश पराया तुझे जाना है" आपने सही किया मुझे दुनिया से जल्दी विदा कर दिया थैंक यु  पापा 

Thursday, 13 December 2012

सम्मान

              मुझे अपने भारत मैं  पढे-लिखे, सभ्य, अमीर लोगों के  नाम की नेक्स्ट जनरेसन  क़ोम  पर पूरा भरोसा है . कि वो हमारे देश को बहुत आगे ले जायेगे।. कल हमारे  मोहल्ले की  नेक्स्ट जनरेसन काम करने वाले मजदूर को  डांट रहे थे। मजदूर लोगो को ये सम्मान देना जानते है। ये सम्मान या उपाधि उनके माँ बहन बेटियों  के जिस्मानी सबंधो से जोड़ रहे थे .क्या करे ये मजदूर लोग इनकी माँ बहन बेटियां  की गलियों के लिए ही बने है आपकी माँ बहन बेटी है तो इज्जत देने के लिए सम्मान पाने के लिए    ...और इनकी माँ बहन तो सिर्फ गलियों के लिए ही है . हमारे  देश मैं तो बिना गलियों के बात ही नहीं होती। या कुछ ऐसा  ही रिवाज़ है। अब आप कहोगे हममे संसकर्ति मैं तो इस तरह तो नहीं होता अगर आप का जबाब यही है तो प्लीज उन लोगो को रोकिये जो गुटके की तरह चबा  कर गलियों से माँ बहन बेटी का रिश्ता जोड़ते है और अपने गंदे मुँह का स्वाद बदल देते है ..नहीं तो  हम मां, बहनें, बेटियां आपकी गालियों के लिए होनेवाले अपने इस्तेमाल के लिए तैयार हैं.लेकिन  याद रखे की इसमें आपकी माँ बहन या बेटी भी इनमे शामिल है ...

Friday, 7 December 2012

फरमान

  • एक परम्परा है, स्त्रियों को हमेशा अपने से कम करके आंको.  सोच की यह धार अभी तक नहीं मिटी है इस्लामी संस्था दारुल उलूम ने कहा है कि मुसलमान महिलाओं के लिए दफ़्तरों में रिसेप्शनिस्ट की तरह से काम करना ग़ैर इस्लामी है.उनका तर्क है कि  , "रिसेप्शनिस्ट को हर तरह के मर्दों से मिलना पड़ता है. बातें करनी पड़ती हैं. इनमें अच्छे और बुरे मर्द भी होते हैं. उनकी हिफ़ाज़त के लिए सही ये होगा की वो रिसेप्शनिस्ट का काम ही न करें" ये तो वही  बात हुई कि अगर बाहर एक्सीडेंट का खतरा है तो आप रोड से कही भी न जाकर घर मैं बैठे रहे .अगर इन्हें मुसलमान महिलाओं की सुरक्षा का इतना  ही  ख्याल है या वे पुरषों के वर्चस्व को बनाये रखना चाहते है ,अगर महिला से आगे बढ़ाना चाहती है,तो इन्हें कोई आपति नहीं होनी चाहिए क्योकि अपनी  सलामती खुद कर सकती है